उत्तराखंड का प्रागैतिहासिक काल और आद्यऐतिहासिक काल UKSSSC Exam Notes
उत्तराखंड का इतिहास अत्यंत प्राचीन और समृद्ध रहा है। इतिहासकार उत्तराखंड के इतिहास को मुख्यतः तीन भागों में विभाजित करते हैं – प्रागैतिहासिक काल, आद्यऐतिहासिक काल और ऐतिहासिक काल। UKSSSC, UKPSC तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में इस विषय से अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं।
उत्तराखंड का प्रागैतिहासिक काल
प्रागैतिहासिक काल वह समय था जब मानव ने लिखना नहीं सीखा था। इसलिए इस काल के बारे में जानकारी हमें लिखित स्रोतों से नहीं बल्कि पुरातात्विक प्रमाणों से प्राप्त होती है।
उत्तराखंड में इस काल के प्रमाण पाषाण युगीन उपकरणों, गुफा चित्रों और प्राचीन मानव के निवास स्थलों के रूप में मिलते हैं। अल्मोड़ा जिले में स्थित लाखु उडियार इस काल का सबसे प्रसिद्ध स्थल है जहाँ प्राचीन गुफा चित्र पाए गए हैं।
इस काल में मानव मुख्यतः शिकार और फल-फूल एकत्र करके जीवन यापन करता था। वह पत्थर के बने औजारों का प्रयोग करता था और गुफाओं या प्राकृतिक आश्रयों में रहता था।
उत्तराखंड का आद्यऐतिहासिक काल
आद्यऐतिहासिक काल वह समय है जब कुछ ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध होते हैं, लेकिन लिखित इतिहास पूरी तरह स्पष्ट नहीं होता। इस काल के बारे में जानकारी हमें पुरातात्विक और साहित्यिक स्रोतों से प्राप्त होती है।
प्राचीन ग्रंथों में उत्तराखंड को केदारखण्ड और मानसखण्ड के नाम से जाना जाता था। यह क्षेत्र प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों की तपोभूमि माना जाता था और वेदों तथा पुराणों में इसका उल्लेख मिलता है।
