UKSSSC Junior Assistant (कनिष्ठ सहायक) /Data Entry Operator Exam Paper 2024 (Official Answer Key)
State Related General Knowledge
1. निम्न कथनों में से कौन-सा कथन सही है/हैं ?
कथन I : हिमरेखा को उस ऊँचाई के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके बाद भूमि स्थाई रूप से बर्फ से ढकी रहती है ।
कथन II : बुग्याल वृक्ष पंक्ति एवं हिम रेखा के बीच उगते है ।
(A) केवल कथन I
(B) केवल कथन II
(C) कथन I और II दोनों
(D) न कथन I और न कथन II
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(C) कथन I और II दोनों
कथन I का विश्लेषण:
भूगोल में हिमरेखा (Snowline) वह न्यूनतम ऊँचाई या सीमा है जिसके ऊपर वायुमंडल का तापमान वर्षभर अमूमन हिमांक (0 डिग्री सेल्सियस) से नीचे रहता है। इस रेखा से ऊपर की भूमि पर सूरज की गर्मी इतनी नहीं पहुँच पाती कि बर्फ पूरी तरह पिघल सके, परिणामस्वरूप वहाँ स्थायी रूप से बर्फ जमी रहती है। हिमरेखा की ऊँचाई अक्षांश (Latitude), ढाल और स्थानीय जलवायु के आधार पर भिन्न हो सकती है (भूमध्य रेखा के पास यह ऊँचाई अधिक होती है और ध्रुवों की ओर यह समुद्र तल के करीब आ जाती है)।
कथन II का विश्लेषण:
हिमालयी क्षेत्रों (विशेषकर उत्तराखंड) में पारिस्थितिकी तंत्र की एक विशिष्ट बनावट होती है।
वृक्ष पंक्ति (Treeline): वह अधिकतम ऊँचाई जहाँ तक प्राकृतिक रूप से बड़े पेड़ या वन उग सकते हैं।
हिमरेखा (Snowline): जहाँ से स्थायी बर्फ शुरू होती है।
बुग्याल (Bugyals): वृक्ष पंक्ति और हिमरेखा के बीच के मध्यवर्ती अल्पाइन क्षेत्र (Alpine Meadows) में प्राकृतिक रूप से उगने वाले पौष्टिक घास के मैदानों को ‘बुग्याल’ कहा जाता है। इन्हें हिमालय के अल्पाइन पाश्चर भी कहा जाता है, जो गर्मियों में पशुओं के चरने के लिए आदर्श माने जाते हैं।
2. उत्तराखण्ड आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार वर्ष 2021-22 में उत्तराखण्ड के जिलों का सकल जिला घरेलू उत्पाद का सही घटता क्रम क्या है ?
(A) हरिद्वार – नैनीताल – ऊ. सि. नगर – देहरादून
(B) ऊ. सि. नगर – देहरादून – हरिद्वार – नैनीताल
(C) हरिद्वार – ऊ. सि. नगर – देहरादून – नैनीताल
(D) ऊ. सि. नगर – हरिद्वार – देहरादून – नैनीताल
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3. सूची – I को सूची – II से सुमेलित कीजिये और सूचियों के नीचे दिये कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये
सूची-I सूची – II
a. तान्या कोटनाला – 1. द ऐपण प्रोजेक्ट
b. शशि बहुगुणा – 2. वैली कल्चर इंडिया
c. मीनाक्षी खाती – 3. भुली डिज़ाइन स्टूडियो
d. शिखा प्रकाश – 4. नमकवाली ब्रांड
. a b c d
(A) 4 3 2 1
(B) 3 4 1 2
(C) 1 2 3 4
(D) 2 1 3 4
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4. निम्नलिखित में से कौन पांडुकेश्वर ताम्र लेखों के लिप्यंतरण से जुड़ा है ?
(A) वी. एस. वाकंकर
(B) मधुकर केशव धवलीकर
(C) राजेन्द्रलाल मित्रा
(D) नयनजोत लाहिरी
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5. निम्न में से कौन-सा उत्तराखण्ड का सबसे बडा बुग्याल है ?
(A) बेदिनी
(B) दयारा
(C) कुशकल्याण
(D) दूधातोली
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(A) बेदिनी
विस्तृत विश्लेषण:
(A) बेदिनी बुग्याल: यह चमोली जिले में स्थित उत्तराखंड का सबसे बड़ा बुग्याल (अल्पाइन घास का मैदान) है। यह त्रिशूल चोटी के समीप स्थित है और यहाँ प्रसिद्ध रूपकुंड ट्रेक भी जाता है।
(B) दयारा बुग्याल: यह उत्तरकाशी जिले में स्थित एक प्रसिद्ध बुग्याल है, जो विंटर स्कीइंग के लिए जाना जाता है।
(C) कुशकल्याण बुग्याल: यह भी उत्तरकाशी जिले में स्थित एक सुंदर अल्पाइन घास का मैदान है।
(D) दूधातोली: यह चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा जिलों की सीमा पर स्थित एक भौगोलिक क्षेत्र (पर्वत श्रृंखला) है, जहाँ से कई नदियाँ निकलती हैं, न कि यह कोई बुग्याल है।
6. उजेली या अनेरी होली त्योहार किस जनजातीय समुदाय से सम्बंधित है ?
(A) थारु
(C) जौनसारी
(B) भोटिया
(D) सन्थाल
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(A) थारु
विस्तृत विश्लेषण:
(A) थारु जनजाति: यह उत्तराखंड की सबसे बड़ी जनजातीय आबादी है (मुख्य रूप से उधम सिंह नगर और चम्पावत में निवास करती है)। थारु जनजाति के लोग दीपावली को शोक पर्व के रूप में मनाते हैं और होली के अवसर पर ‘उजेली’ या ‘अनेरी होली’ का त्योहार मनाते हैं।
(B) भोटिया जनजाति: यह सीमांत क्षेत्रों (चमोली, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी) में निवास करने वाली जनजाति है, जो मुख्य रूप से कर्मा, शॉल बुनने और ग्रीष्मकालीन/शीतकालीन प्रवास के लिए जानी जाती है।
(C) जौनसारी जनजाति: यह देहरादून के जौनसार-बावर क्षेत्र की प्रमुख जनजाति है, जो माघ मेला, बिशु और अंध्यारी/उज्यारी जैसे त्योहारों के लिए प्रसिद्ध है।
(D) सन्थाल: यह भारत के झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा क्षेत्रों की प्रमुख जनजाति है, जिनका उत्तराखंड से संबंध नहीं है।
7. निम्न में कुमाऊँ क्षेत्र से सम्बन्धित नृत्य-गीत है
(A) रासों
(B) हारूल
(C) छपेली
(D) छोपती
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(C) छपेली
विस्तृत विश्लेषण:
(C) छपेली: यह कुमाऊँ और गढ़वाल दोनों क्षेत्रों में प्रचलित एक प्रसिद्ध लोकनृत्य है, लेकिन मुख्य रूप से यह कुमाऊँ क्षेत्र में प्रेम, शृंगार और जीवन के उल्लास को दर्शाने वाला प्रमुख नृत्य-गीत है, जिसमें नर्तक के एक हाथ में रुमाल और दूसरे हाथ में दर्पण होता है।
(A) रासों: यह जौनसार-बावर (गढ़वाल क्षेत्र) से संबंधित एक प्रमुख नृत्य है।
(B) हारूल: यह जौनसारी जनजाति (गढ़वाल मंडल) का बेहद लोकप्रिय नृत्य है, जो हर की दून घाटी में विशेष रूप से किया जाता है।
(D) छोपती: यह मुख्य रूप से गढ़वाल (विशेषकर चमोली और रुद्रप्रयाग) क्षेत्र का एक लोकप्रिय प्रेम गीत और नृत्य है।
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9. हाल ही में उत्तराखण्ड में निम्नलिखित में से किस स्थान पर पहले RuTAG स्मार्ट विलेज सेंटर का उद्घाटन किया गया ?
(A) सरमोली
(B) खूँट
(C) डाकुरा
(D) दागुरा
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10. नदियों को उनके उद्गम से सुमेलित कीजिए ।
कॉलम – A कॉलम – B
1. भिल्लंगना a. दूधातोली
2. मंदाकिनी b. देवताल
3. सरस्वती c. केदारनाथ
4. अलकनंदा d. खतलिंग
5. रामगंगा e. सतोपथ
. 1 2 3 4 5
(A) b c e a d
(B) d c b e a
(C) d c e a b
(D) a c b e d
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(B) d c b e a
उत्तराखंड की सिंचाई प्रणालियों और इतिहास से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बिंदु:बीजापुर नहर का निर्माण: इस नहर का डिज़ाइन और रूपरेखा ब्रिटिश अभियंता सर प्रोबी थॉमस कौटले (Sir Proby Thomas Cautley) — जिन्हें सामान्यतः कैप्टन कौटले कहा जाता है — द्वारा तैयार की गई थी।
नदी और वर्ष: यह नहर देहरादून में टोंस नदी से निकाली गई है, जिसका निर्माण कार्य लगभग 1839–1841 के दौरान किया गया था।
अन्य प्रमुख नहरें (ब्रिटिश काल व पूर्व):
राजपुर नहर: यह देहरादून की सबसे पुरानी नहर है जिसका निर्माण पंवार वंश की रानी कर्णावती के शासनकाल में हुआ था।
अन्य परियोजनाएं: ब्रिटिश काल में कौटले ने गंगा नहर और दून घाटी की कई जल प्रणालियों के विकास में प्रमुख भूमिका निभाई थी
11. निम्नलिखित में से किसे तत्कालीन देहरादून में बीजापुर नहर के निर्माण का श्रेय दिया जाता है ?
(A) कर्नल यंग
(B) कर्नल मूर
(C) कैप्टन कौटले
(D) उपरोक्त में से कोई नहीं
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(C) कैप्टन कौटले
उत्तराखंड की सिंचाई प्रणालियों और इतिहास से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बिंदु:
बीजापुर नहर का निर्माण: इस नहर का डिज़ाइन और रूपरेखा ब्रिटिश अभियंता सर प्रोबी थॉमस कौटले (Sir Proby Thomas Cautley) — जिन्हें सामान्यतः कैप्टन कौटले कहा जाता है — द्वारा तैयार की गई थी।
नदी और वर्ष: यह नहर देहरादून में टोंस नदी से निकाली गई है, जिसका निर्माण कार्य लगभग 1839–1841 के दौरान किया गया था।
अन्य प्रमुख नहरें (ब्रिटिश काल व पूर्व):
राजपुर नहर: यह देहरादून की सबसे पुरानी नहर है जिसका निर्माण पंवार वंश की रानी कर्णावती के शासनकाल में हुआ था।
अन्य परियोजनाएं: ब्रिटिश काल में कौटले ने गंगा नहर और दून घाटी की कई जल प्रणालियों के विकास में प्रमुख भूमिका निभाई थी।
12. “इस वृक्ष की पत्तियाँ जानवरों के चारे के रूप प्रयुक्त की जाती हैं, इसका रेशा रस्सी बनाने के लिए प्रयुक्त होता है, और इसकी लकड़ी का ऊष्मीय मान अधिक होने के कारण इसका प्रयोग जलौनी लकड़ी के रूप में किया जाता है” – यह कथन उत्तराखण्ड में पाये जाने वाले किस वृक्ष के लिए सही बैठता है ?
(A) तिमिल
(B) चीड़
(C) भींगल
(D) खड़क
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(C) भींगल (सही उत्तर)
वानस्पतिक नाम: Grewia optiva (इसे स्थानीय भाषा में ‘भीमल’ या ‘भींगल’ कहा जाता है)।
उपयोग:
इसकी पत्तियों का उपयोग पशुओं के चारे के रूप में किया जाता है, जिससे दुधारू पशुओं में दूध की मात्रा बढ़ती है।
इसकी छाल से निकलने वाले रेशे से मजबूत रस्सियाँ, बोरियाँ और चप्पलें बनाई जाती हैं।
इसकी लकड़ी का ऊष्मीय मान (Calorific Value) उच्च होता है, जिस कारण यह एक बेहतरीन जलौनी लकड़ी (Firewood) है। इसके अलावा इसकी छाल का उपयोग पारंपरिक रूप से बाल धोने (प्राकृतिक शैंपू) के लिए भी किया जाता है।
(A) तिमिल (Timil / Ficus auriculata)
यह एक मध्यम आकार का पर्णपाती वृक्ष है जो मुख्य रूप से हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है।
इसकी बड़ी और चौड़ी पत्तियों का उपयोग भी मुख्य रूप से पशुओं के चारे के लिए किया जाता है। इसके फल खाने योग्य होते हैं और स्थानीय भाषा में इसे ‘तिमिला’ कहा जाता है।
(B) चीड़ (Pine / Pinus roxburghii)
यह उत्तराखंड के मध्य हिमालयी क्षेत्रों (विशेषकर 900 से 2000 मीटर की ऊँचाई पर) में पाया जाने वाला प्रमुख शंकुधारी (Coniferous) वृक्ष है।
इससे लीसा (Resin) प्राप्त किया जाता है, जिसका उपयोग तारपीन का तेल, पेंट और वार्निश बनाने में होता है। इसकी सूई जैसी पत्तियों (पिरुल) का उपयोग खाद और ऊर्जा उत्पादन (पिरुल लाओ-बिजली पाओ योजना) में किया जाता है।
(D) खड़क (Khadak / Celtis australis)
इसे स्थानीय भाषा में ‘खड़ीक’ या ‘खड़क’ भी कहा जाता है। यह एक कठोर लकड़ी वाला पर्णपाती पेड़ है।
इसकी पत्तियों का उपयोग भी पशु चारे के लिए किया जाता है और इसकी मजबूत लकड़ी का उपयोग कृषि उपकरण (जैसे हल के हिस्से) तथा जलावन के रूप में किया जाता है।

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