भारत की बहुउदेशीय परियोजना
दामोदर घाटी परियोजना (Damodar Valley Project)
दामोदर घाटी निगम (Damodar Valley Corporation – DVC) की स्थापना 7 जुलाई 1948 को स्वतंत्र भारत की पहली बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना के रूप में की गई थी। इसका उद्देश्य दामोदर नदी घाटी का समग्र विकास करना था। यह निगम एक विशेष अधिनियम (कानून) के अंतर्गत अस्तित्व में आया।
यह परियोजना भारत की अन्य बहुउद्देशीय परियोजनाओं की तरह अमेरिका की टेनेसी घाटी परियोजना (Tennessee Valley Authority – TVA) से प्रेरित है। टेनेसी घाटी परियोजना का निर्माण जल संसाधनों के अधिकतम एवं समन्वित उपयोग के उद्देश्य से किया गया था। इसी मॉडल को आधार बनाकर दामोदर घाटी परियोजना विकसित की गई।
दामोदर घाटी परियोजना के अंतर्गत 8 बाँध तथा एक बड़ा बैराज बनाया गया है। इनमें क्रमशः बराकर नदी पर मैथन बाँध, तिलैया बाँध, दामोदर नदी पर पंचेत हिल बाँध, मैथन बाँध, अय्यर बाँध, बोकारो नदी पर बोकारो बाँध, कोनार नदी पर कोनार बाँध तथा दुर्गापुर के निकट एक बड़ा बैराज बनाया गया है।
तापीय विद्युत गृह (Thermal Power Stations)
- बोकारो तापीय विद्युत स्टेशन ‘A’, झारखंड – 1200 मेगावाट (MW)
- बोकारो तापीय विद्युत स्टेशन ‘B’, झारखंड – 630 मेगावाट (MW)
- चंद्रपुरा तापीय विद्युत स्टेशन, झारखंड – 890 मेगावाट (MW)
- दुर्गापुर तापीय विद्युत स्टेशन, पश्चिम बंगाल – 350 मेगावाट (MW)
- दुर्गापुर स्टील तापीय विद्युत स्टेशन, पश्चिम बंगाल – 1000 मेगावाट (MW)
- मेजिया तापीय विद्युत स्टेशन, पश्चिम बंगाल – 2340 मेगावाट (MW)
- कोडरमा तापीय विद्युत स्टेशन, झारखंड – 500 + 500 मेगावाट (MW)
- रघुनाथपुर तापीय विद्युत स्टेशन, पश्चिम बंगाल – 1200 मेगावाट (MW)
जलविद्युत गृह (Hydel Power Stations)
- तिलैया बाँध, झारखंड – 4 मेगावाट (MW)
- मैथन बाँध, झारखंड – 63.2 मेगावाट (MW)
- पंचेत बाँध, झारखंड – 80 मेगावाट (MW)
गैस आधारित विद्युत गृह (Gas Power Station)
- मैथन गैस टर्बाइन स्टेशन (Maithon Gas Turbine Station), झारखंड – 82 मेगावाट (MW)
